1. জন্মদিন ( শুভ দাশগুপ্ত ) আজ পয়লা শ্রাবণ। খোকন, আজ তোর জন্মদিন। তুই যখন জন্মেছিলি, আমরা তখন যাদবপুরে নতুন গড়ে ওঠা কলোনীর টালির ঘরে তোর ইস্কুল মাস্টার বাবা সেই হ্যারিকেনের আলো জ্বলা ঘরেই আনন্দে আর খুশিতে ঝলমলে হয়ে উঠেছিলেন তুই আসার পর। তোর নাম রেখেছিলেন- সুকল্যাণ। মানুষটার মনটা ছিল শিশুর মতন অভাবে অনটRead more

    জন্মদিন ( শুভ দাশগুপ্ত )

    আজ পয়লা শ্রাবণ।
    খোকন, আজ তোর জন্মদিন।
    তুই যখন জন্মেছিলি, আমরা তখন যাদবপুরে
    নতুন গড়ে ওঠা কলোনীর টালির ঘরে
    তোর ইস্কুল মাস্টার বাবা
    সেই হ্যারিকেনের আলো জ্বলা ঘরেই
    আনন্দে আর খুশিতে ঝলমলে হয়ে উঠেছিলেন
    তুই আসার পর। তোর নাম রেখেছিলেন- সুকল্যাণ।
    মানুষটার মনটা ছিল শিশুর মতন
    অভাবে অনটনে, বেঁচে থাকার নানা দুর্বিপাকেও
    ভেঙ্গে পড়তেন না কখনও। সকলের ভাল চাইতেন মন থেকে।
    বলতেন দেখো একদিন এই দেশের মানুষ
    ঠিক খুঁজে পাবে মুক্তির পথ। শোষণ থেকে মুক্তি
    দারিদ্র থেকে মুক্তি অশিক্ষা থেকে মুক্তি…

    আজ পয়লা শ্রাবণ
    খোকন, আজ তোর জন্মদিন।
    ছোটবেলায়, তোর মনে আছে? আমাদের ভাঙ্গা মেঝেতে
    বাক্স থেকে বার করা মেজো-মাসীর হাতে তৈরি আসনটা
    পেতে দিতাম। সামনে রাখতাম ঠাকুরের আসনের প্রদীপখানা।
    তুই বসতিস বাবু হয়ে চুপটি করে।
    তোকে আমরা একে একে ধান দুব্বো মাথায় দিয়ে আশীর্বাদ করতাম।
    বাবা বলতেন বড় হও মানুষ হও।
    তোর বাবার সেই বন্ধু-ঘোষ কাকা তিনি বলতেন
    বেঁচে বর্তে থাকো।
    তুই জিগ্যেস করতিস-মা, বর্তে মানে কি মা?
    আমি শুধু তোর মাথায় ধান-দুব্বোই দিতাম।
    বলতাম না কিছুই। শুধু মনে মনে বলতাম
    ঠাকুর, আমার খোকনকে মস্ত বড় মানুষ করে তোলো
    আমার খোকন যেন সত্যিই মানুষ হয়।
    ওর যেন কখনো কোনো বিপদ না হয় ঠাকুর।
    অভাবের সংসারে ওই একটা দিন-পয়লা শ্রাবণ
    কষ্টের পয়সায় একটু বাড়তি দুধ নিতাম।
    পায়েস রান্না করে দিতাম তোকে।
    তুই খুব ভালবাসতিস পায়েস খেতে।
    তোর বাবা বাসস্টান্ডের দোকান থেকে নিয়ে আসতেন
    তোর প্রিয় মিষ্টি ছানার গজা।
    সামান্য ইস্কুল মাস্টারিতে কীই বা আয় হত;
    ঘরে বসে ছাত্র পড়িয়ে আসতো কিছু।
    দাউ দাউ অভাবের আগুনে সে রসদ পুড়তে সময় লাগত না।
    তোর বাবার জামা সেলাই করতাম আর বার বার বলতাম
    আসছে মাসে একটা জামা বানিয়ে নিও।
    উনি হেসে উঠে বলতেন; বাদ দাও তো, খোকন বড় হচ্ছে।
    ওর জন্য ভাবছি দুধ রাখতে হবে আরো আধসের-
    দুধে শক্তি বাড়ে। বুদ্ধি বাড়ে। শক্তি আরে বুদ্ধি না হলে
    তোমার খোকন মস্ত বড় মানুষ হয়ে উঠবে কি করে?
    ভাবছি আরো দুটো টিউশনি নেব।
    ছাত্র পড়িয়ে পড়িয়ে মানুষটা দিনের শেষে ক্লান্ত হয়ে যেতেন।
    বারান্দার ধার ঘেঁষে যখন রাতের অন্ধকারে জোনাকির ব্যস্ততা,
    আর ঘরে তোর পড়া মুখস্থ করার একটানা সুর
    আমাদের কলোনীর ভাঙ্গাচূড়া বাড়িটাকে জীবন্ত করে রাখতো-
    তখন বলতেন আমায়; খাওয়া দাওয়া একটু করো- তোমার চেহারাটা
    বড় ভেঙ্গে পড়ছে দিন দিন… শাড়িটাও তো দেখছি বেশ ছিঁড়েছে-
    কালই আমি ফেরার পথে একটা শাড়ি নিয়ে আসব। ধারেই আনব।
    আমি বলতাম-ধুর। সামনে খোকনের উঁচু ক্লাস-
    কত বই পত্তর কিনতে হবে- কত খরচ।
    উনি দীর্ঘশ্বাস ফেলে চুপ করে যেতেন।
    জোনাকিরা নিঃশব্দ অদৃশ্য আলোর আলপনা আঁকত
    উঠনের আগাছার ঝোপে।
    আবহ সঙ্গীতের মত তুই ভেতরে বসে বসে পড়া মুখস্থ করতিস।
    ইতিহাস, ভূগোল, গ্রামার।
    ঈশ্বর আমাদের নিরাশ করেননি।
    তুই কত বড় হলি।
    সব পরীক্ষায় কত ভাল ফল হল তোর।
    বাবা বললেন; আরও পড়। উচ্চ শিখাই উচ্চ সম্মানের
    এক মাত্র পথ। তুই আরও পড়লি।
    তারপর…
    তোর চাকরি হল কত বড় অফিসে
    মনে আছে খোকা? প্রথম মাসের মাইনে হাতে পেয়েই
    তুই কত কী কিনে এনেছিলি?
    তখন তো আমরা উঠে এসেছি শ্যামবাজারে।
    দু’কামরার বেশ সাজানো ঘোচানো গোছানো বড় ফ্লাট।
    তোর অফিস থেকেই তো দিয়েছিল।
    সেই বাড়ি সেই ঘর সেই বেলকনি- কত স্মৃতি- কত ছবি!
    ঐ বাড়িতেই তো
    আশ্বিনের ঝড়ো বিকেলে- তোর মনে আছে খোকন?
    তোর বাবা যেদিনটাতে চলে গেলেন- মনে আছে?
    তুই বাবার বুকের ওপর পড়ে যখন কাঁদছিলি হাপুস নয়নে
    সদ্য স্বামীহারা, আমি সেদিন তোর সেই অসহায় মুখ দেখে
    আরো বেশি করে ভেঙ্গে পড়েছিলাম।
    তোকে বুকে টেনে নিয়েছিলাম ছোটবেলার মত।
    বলেছিলাম-
    কাঁদিস না খোকা। আমিতো আছি।

    আজ পয়লা শ্রাবণ
    কলকাতা থেকে অনেক দুরে মফস্বলের এই বৃদ্ধাশ্রমে
    আমি একেবারে একা, খোকন।
    তোকে বড় দেখতে ইচ্ছে করছে রে।
    তোকে, বৌমাকে আর ছোট্ট বিল্টুকে।
    তোরা এখন কত দুরে-
    সল্ট-লেকের মার্বেল বসানো ঝকঝকে বাড়িতে।
    আজ তোর জন্মদিনের নিশ্চয়ই খুব বড় পার্টি হচ্ছে-
    তাই নারে খোকন? লোকজন, হৈচৈ, খাওয়া-দাওয়া।
    খুব ভাল, খুব ভাল।
    খোকন, আজ পয়লা শ্রাবণ
    আমার বড় মনে পড়ছে যাদবপুরের ভাঙ্গা ঘরে রাত্রে
    তুই আমার পাশে শুয়ে মাঝে মধ্যে হঠাৎ খুব ভয় পেয়ে
    জড়িয়ে ধরতিস আমাকে। আমি বলতাম, ভয় কী রে?
    আমি তো আছি। মা তো আছে খোকনের। যার মা থাকে
    তাকে কী ভুতে ধরে?
    তুই নিশ্চিন্ত হয়ে ঘুমিয়ে পড়তিস আমার বুক জুড়ে।
    তোর আধুনিক সংসারে
    এই বুড়িটার একটু ঠাই হল নারে?
    প্রতিমাও তো মা। ওরও তো আছে আমার খোকনেরই মত
    কোল আলো- করা এক চাঁদের টুকরো।
    কিন্তু সময়ের কী আশ্চর্য পরিবর্তন!
    খোকন!
    তুই বোধহয় আর এখন পায়েস খাস না- তাই নারে?

    তুই জানিস না খোকন
    আজ আমি সকালে পায়েস রান্না করেছি। হ্যাঁ
    তোরই পাঠানো টাকায়।
    সারাদিন সেই পায়েসের বাটি সামনে নিয়ে বসে আছি রে।
    এখানে এই বৃদ্ধাশ্রমে
    আমার একলা ঘরে
    আর কেউ নেই।
    তুই একবার আসবি খোকন।
    একবার.. শুধু

    একবার।।

     

    English Transliteration:

    Aaj poyla Srabon.
    Khukhan, aaj tor jonmodin
    Tui jakhan jonmechili, amra takhan Jadabpur e
    Natun gore utha colony r talir ghore.
    Tor school master baba
    Shei Haricaner alo jola ghorei
    Aanonde ar khushite jhalmal hoye uthechilen
    Tui ashar par. Tor naam rekhechilen Sukalyan.
    manushtar monta chilo shishur moton
    obhabe onotane, beche thakar nana durbipakeo
    Venge porten na khokhono. Shokoler valo chaiten mon theke
    Bolten dekho ekdin ei desher manush
    Thik khuje pabe muktir poth. Shushan theke nukti
    Doridro theke mukti oshikkha theke mukti..

    Aaj poyla Srabon.
    Khukhan, aaj tor jonmodin
    Chotobelay tor mone aache? Amader bhanga mejete
    Bakso theke bar kora mejo mashir haate toiri aashonta
    pete ditam. Shamne rakhtam thakurer aashaner prodipkhana
    tui boshtis babu hoye chupti kore.
    toke amay eke eke dhan dubba mathay diye aashirbaad kortam
    Baba bolten boro ho manush ho.
    Tor baba shei bandhu-ghosh kaka tini bolten
    beche borte thako.
    Trui jeggesh kortish maa, Borte mane ki maa?
    Ami shudhu tor mathay dhan dobboi ditam
    Boltam na kichui. Shudhu mone mone boltam
    thakur, Amar khukhanke masta boro manush kore tulo.
    Amar khukhan jeno shotti manush hoy
    Or jeno kokhono kuno bipod na hoy thakur
    Obhaver shongshare oi ekta din poyla srabon
    kashter poyshar ektu barti dudh nitam.
    Payesh ranna kore ditam toke
    tui khub valo bhastish payesh khete.
    Tor baba bus stander dukan thekeniye aashten
    Tor priyo misti chanar goja.
    Shamanno school mastarite ki ba aay hoto;
    ghore boshiye chatro podiye aashto kichu
    dau dau obhaber aagune she rashad purte shomoy lagto na
    tor babar jama shelai kortam ar baar baar boltam
    Asshche mashe ekta jama baniye niyo
    Uni heshe bolten; Baad dao to, Khukhan boro hocche.
    Or jonno bhavchi dudh rakhte hobe aaro aadhsher
    Dudhe shakti bare. buddhi bare. Shakti aare briddi na hole
    tumar khukhan masta boro manush hoye uthbe ki kore?
    bhavchi aro duita tution nebo.
    chatro poriyr poriye manushta diner sheshe klanta hoye jeten.
    barandar dhar geshe jakhan raater ondhokare jonakir bestota
    aar ghore tor pora mukhasta korar ektana shur
    amader colony r bhanga chura baritake jibonta kore rakhto
    Takhan bolten aamay; khawa dawa ektu koro- tumar cheharata
    baro venge porche din din..Sharitao to dekhchi besh chireche-
    kal e ami ferar pathe ekta shari niye aashbo. dharei anbo
    Ami boltam dhur. shamne khokhaner uchu class-
    Koto boi pattar kinte hobe- koto kharach
    uni dirghosshash fele chup kore jeten.
    honakira nisshobda odrishyo aalpona aakto
    uthoner aagachar jhope.
    Aaboho shangiter moto tui bhetore boshe boshe pora mukasta kortish
    Itihash, Vugal, r
    grammar.

    Isshar amader nirash korenni
    Tui koto boro holi
    Shab porikkay koto valo fol holo tor
    baba bollen aaro por . uccho shikka e uccho shommaner
    Ek matro path. Tui aaro mporli.

    Tarpar
    Tor chakri holo koto boro office e
    Mone aache khoka? Prothom masher maine haate peye e
    tui koto ki kine enechili?
    takhan to Amra uthe eshechi Shyambazare
    Du kamrar besh shajano ghochano gochano boro flat.
    to office thekei to diyechilo.
    Shei bari shei ghar shei balkoni- koto smriti koto chobi
    Ei baritei to
    Aashiner jhoro bikele-tor mone aache khokon?
    tor baba jedinta te chole gelen-mone aache?
    tui babar buker upar pare jakhan kadchili hapush nayane
    shodyo shamihara, Ami shedin tor she oshohay mukh dekhe
    Aaro beshi kore venge porechilam
    toke buke tene niyechilam choto belar moto.
    Bolechilam
    Kadish na khoka amito aachi
    Aaj poyla srabon
    Kolkata theke onek dure mofossoler ei briddsrome
    Ami ekebare eka, khokon
    Toke dekhte boro icche korche re
    toke, boumake r chotto biltuke
    tora ekhon onek dure
    salt laker, marbel boshano jhakjhake barite.
    Aaj tor jonmodine nishoy khub boro party hocche.
    tai nare khokon? lokjon hoichoi, khawa dawa.
    khub valo, khub valo.

    Khokon, Ajj poyla srabon
    Amar boro mone porche jadabpurer bhanga ghore ratre
    Tui amar pashe shuye majhe modde hotath khub voy peye
    joriye dhortish amake. Ami boltam, voy ki re?
    Ami to aachi. Maa to aache khokoner. jar maa thake
    tate ki bhute dhore?
    tui nischinto ghumiye portish amar buk jure.
    tor aadhunik songshare
    ei buritar ektu thai holo nare?
    Pritimao to maa . oro to aache amar khokoner e moto
    Kol aalo kora ek chader tukro.
    Kintu shomoyer ki aashcharjo poribortan.
    Khokon!
    Tui budhoy ekhon r payesh khas na-tai na re?
    Tui janish na khokon
    Aaj ami shokale payesh ranna korechi. Hay
    Tor e pathano takai
    Sharadin shei payesher bati shamne niye boshe aacchi re
    Ekhane ei briddasrome
    Amar ekla ghore
    Aar keu nei
    Tui ekbaar aashbi khokon
    Ekbaar..shudhu
    Ekbaar.

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  2. শারদীয়া –শুভ দাশগুপ্ত গেরুয়া নদীর পাড় ঘেষে সেই ছোট্ট আমার গ্রাম ছেলেবেলার ছেলেখেলার সেই আনন্দধাম। আকাশ ছিল সুনীল উদার রোদ্দুরে টান টান, গেরুয়া নদীর পাড় ঘেষে সেই ছোট্ট আমার গ্রাম গেরুয়া নদীর পাড় ঘেষে সেই গ্রামের শেষ পাড়া, নবীন কাকার কুমোর বাড়ি, ঠাকুর হত গড়া। সাত পাড়াতে বেজায় খ্যাতি, নবীন তRead more

    শারদীয়া –শুভ দাশগুপ্ত

    গেরুয়া নদীর পাড় ঘেষে সেই ছোট্ট আমার গ্রাম
    ছেলেবেলার ছেলেখেলার সেই আনন্দধাম।
    আকাশ ছিল সুনীল উদার রোদ্দুরে টান টান,
    গেরুয়া নদীর পাড় ঘেষে সেই ছোট্ট আমার গ্রাম
    গেরুয়া নদীর পাড় ঘেষে সেই গ্রামের শেষ পাড়া,
    নবীন কাকার কুমোর বাড়ি, ঠাকুর হত গড়া।
    সাত পাড়াতে বেজায় খ্যাতি, নবীন তালেবর,
    নবীন কাকার হাতের ঠাকুর অপূর্ব সুন্দর।
    এক এক বছর এক এক রকম ঠাকুর তৈরি হতো,
    সেসব ঠাকুর দেখতে মানুষ বেজায় ভিড় জমাতো।
    স্কুল পালানো দুপুর ছিলো, ছিলো সঙ্গী সাথী,
    চোখ জুড়ানো মূর্তি দেখতে ভীষণ মাতামাতি।
    শারদীয়ার দিন গড়াতো শিউলি গন্ধে দুলে,
    রোজই যেতাম ঠাকুর গড়া দেখতে সদলবলে।
    নবীন কাকা গরিব মানুষ, সদাই হাসিমুখে,
    নিবিষ্ট মন, ব্যস্ত জীবন, আপন ভোলা সুখে।
    হাতের ছোঁয়ায় তৈরি হতো লক্ষ্মী, গণেশ, পেঁচা,
    দূর গাঁয়ে তার ছোট্ট বাড়ি, ঠাকুর গড়েই বাঁচা।
    সে বছর কি হলো বলি, শোনো দিয়ে মন,
    বন্যা হলো ভীষণরকম ভাসলো যে জীবন।
    কত মানুষ ঘর হারালো, প্রাণ হারালো কত,
    গোটা গ্রামের বুকটি জুড়ে হাজার আঘাত ক্ষত।
    ধানের জমি পাটের ক্ষেতে জল থৈ থৈ বান,
    সর্বনাশের কান্না ঘেরা হাজার নিঃস্ব প্রাণ।
    বর্ষা শেষে বন্যা গেল, জাগলো শারদ আলো,
    নীল আকাশে পুজোর ছুটি দিব্যি ডাক পাঠালো।
    কাশফুলেরা উঠল দুলে, শিউলি ঝরা দিন,
    পুজো আসছে রোদ্দুরে তাই বাজলো খুশির বীণ।
    নবীন কাকার টালির ঘরে হচ্ছে ঠাকুর গড়া,
    গেরুয়া নদীর পাড় ঘেঁষে গ্রাম জাগলো খুশির সাড়া।
    আমরা যত কচিকাঁচা, আবার জড়ো হয়ে,
    ঠাকুর দেখতে গেলাম ছুটে মাঠ ঘাট পেরিয়ে।
    সেবার মাত্র গুটিকয়েক ঠাকুর টালির ঘরে,
    পুজোর আয়োজন তো সেবার নমোনমো করে।
    তারই মধ্যে একটি ঠাকুর টালির চালের কোনে,
    নবীন কাকা ভাঙেন, গড়েন নিত্য আপন মনে।
    অন্য ঠাকুর দেখতে চাইলে বাধা দিতেন না,
    ওই ঠাকুরটি দেখতে চাইলে না শুধু না।
    কৌতূহলে দিন গড়ালো পুজো এলো কাছে,
    মহালয়ার দিন টি এলো পুজোর খুশির সাজে।
    আমরা কয়জন রাত থাকতে উঠেছি ঘুম ছেড়ে,
    পুবের আকাশ মলিন, আলো ধীরে উঠছে বেড়ে।
    অন্ধকারে চুপিসারে গুটিগুটি পায়ে,
    আমরা হাজির নবীন কাকার ঘরের কিনারায়।
    চুপ্টি করে দরজা ঠেলে ভিতরে গিয়ে,
    দেখি কাকা চোখ আঁকছেন সমস্ত মন দিয়ে।
    চোখ আঁকা যেই সাঙ্গ হল, নিথর নবীন কাকা,
    অঝোর ধারে কেঁদেই চলেন দুহাতে মুখ ঢাকা।
    কাঁদছে শিল্পী, নিরব বিশ্ব, কুপির আলো ঘরে,
    নবীন কাকার পাষাণ হৃদয় কান্না হয়ে ঝরে।
    রাত ফুরোনো ভোরের আকাশ, কৃপণ অল্প আলো,
    মুখ দেখলাম সেই ঠাকুরের, প্রাণ জুড়িয়ে গেল।
    কিন্তু একি? এ মুখ তো নয় দুর্গা বা পার্বতী?
    এ যেন এক ঘরের মেয়ে, চেনা জানা অতি।
    নবীন কাকার সামনে গিয়ে কি হয়েছে বলি,
    কেঁদে বলেন নবীন কাকা সবই জলাঞ্জলি।
    শ্রাবণ মাসে বন্যা হলো, গেল অনেক কিছু,
    মারণব্যাধি এলো তখন বানের পিছু পিছু।
    ভাদ্র মাসের পূর্ণিমাতে সেই ব্যধি যে ধরল,
    মেয়ে আমার অনেক কষ্টে যন্ত্রনাতে মরল।
    ঠাকুর গড়ি, দু হাত আমার অবশ হয়ে আসে,
    সব প্রতিমার মুখ জুড়ে ওই মেয়ের মুখটি ভাসে।
    দ্যাখ্ না তোরা, দ্যাখ্ না সবাই, চোখ আঁকা শেষ হলো,
    দ্যাখ্ না এইতো মেয়ে আমার হাসছে ঝলোমলো।
    কোথায় গেলি মা রে আমার? কোথায় তোকে পাই?
    মূর্তি গড়ে খুঁজি তোকে মূর্তিতে তুই নাই।
    ষষ্ঠী এলে বোধন, দেবীর প্রাণ প্রতিষ্ঠা হবে,
    জাগবে ঠাকুর, কিন্তু আমার মেয়ে ফিরবে কবে?
    কেউ কি কোন মন্ত্র জানো মৃন্ময়ী এই মেয়ে,
    বাবার চোখের জল মোছাতে উঠবে হেসে গেয়ে?
    আমরা অবাক! মহালয়ায় ভোরের শিউলি ঝরে,
    কি নিদারুণ ঠাকুর পুজো নবীন কাকার ঘরে!

     

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    মা - শুভ দাসগুপ্ত যখন ডাকি শিউলি হয়ে শরৎ তখন ভোরের হাওয়ায় বলে কান্না রাখিস না মা তো ছিলই মা তো আছেই, সবখানেতেই মা যখন ডাকি মা সহস্র চোখ বিপন্ন মুখ দুহাত তুলে বলে বাইরে খোঁজিস না ব্যর্থ জীবন ক্লান্ত জীবন পাশেই আছে মা মা ববলেই স্নেরের সকাল মা বললেই তৃষ্ণার জল মা বললেই ছায়ার আচল মা বললেই দুঃখ উধাও যখনRead more

    মা – শুভ দাসগুপ্ত

    যখন ডাকি শিউলি হয়ে শরৎ তখন
    ভোরের হাওয়ায় বলে
    কান্না রাখিস না মা তো ছিলই মা তো আছেই,
    সবখানেতেই মা
    যখন ডাকি মা
    সহস্র চোখ বিপন্ন মুখ দুহাত
    তুলে বলে বাইরে খোঁজিস না
    ব্যর্থ জীবন ক্লান্ত জীবন পাশেই আছে মা
    মা ববলেই স্নেরের সকাল
    মা বললেই তৃষ্ণার জল
    মা বললেই ছায়ার আচল
    মা বললেই দুঃখ উধাও
    যখন ডাকি মা
    মন্দিরে আর গীর্জিয় কিংবা মসজিদে
    সুর ভাসে একই তো সুর না
    মানুষ বড় কষ্টে আছে
    মানুষ বড় দুঃখে বাঁচে
    মানুষ বড় যাতাকলে
    মানুষ বড় চোখের জলে
    এর নেই কি শান্তনা
    দূরের থেকে মা তখনই উঠে আসেন কাছে
    শীয়রে হাত রেখে বলেন
    আমি আছি না
    যখন ডাকি মা

     

    English transliteration;

    Jakhan daki shuili hoye sharat takhan
    Vorer hawai bole
    kanna rakhish na maa to chiloi maa to aachei,
    Shabkhanetei ma
    jakhan daki maa
    Shahasra chokh biponno mukh duhaath
    Tui bole baire khujish na
    Bertho jibon klanta jibon pashei aache maa
    maa bollei sneher shakal
    maa bollei trishnar jol
    maa bollei chayar aanchal
    maa bollei dukkho udhao
    jakhan daki maa
    Mandire aar girjay kingba mashjide
    Shur vashe eki to shur na
    manush baro kaste aache
    manush baro dukkhe bache
    manush baro jatakale
    manush baro chokher jale
    Er nei ki shantona
    durer theke maa takhani uthe aashen kache
    Shiyore haath rekhe bolen
    Ami aaschi na
    jakhan daki maa

     

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  4. This answer was edited.

    শারদীয়া –শুভ দাশগুপ্ত গেরুয়া নদীর পাড় ঘেষে সেই ছোট্ট আমার গ্রাম ছেলেবেলার ছেলেখেলার সেই আনন্দধাম। আকাশ ছিল সুনীল উদার রোদ্দুরে টান টান, গেরুয়া নদীর পাড় ঘেষে সেই ছোট্ট আমার গ্রাম গেরুয়া নদীর পাড় ঘেষে সেই গ্রামের শেষ পাড়া, নবীন কাকার কুমোর বাড়ি, ঠাকুর হত গড়া। সাত পাড়াতে বেজায় খ্যাতি, নবীন তRead more

    শারদীয়া –শুভ দাশগুপ্ত

    গেরুয়া নদীর পাড় ঘেষে সেই ছোট্ট আমার গ্রাম
    ছেলেবেলার ছেলেখেলার সেই আনন্দধাম।
    আকাশ ছিল সুনীল উদার রোদ্দুরে টান টান,
    গেরুয়া নদীর পাড় ঘেষে সেই ছোট্ট আমার গ্রাম
    গেরুয়া নদীর পাড় ঘেষে সেই গ্রামের শেষ পাড়া,
    নবীন কাকার কুমোর বাড়ি, ঠাকুর হত গড়া।
    সাত পাড়াতে বেজায় খ্যাতি, নবীন তালেবর,
    নবীন কাকার হাতের ঠাকুর অপূর্ব সুন্দর।
    এক এক বছর এক এক রকম ঠাকুর তৈরি হতো,
    সেসব ঠাকুর দেখতে মানুষ বেজায় ভিড় জমাতো।
    স্কুল পালানো দুপুর ছিলো, ছিলো সঙ্গী সাথী,
    চোখ জুড়ানো মূর্তি দেখতে ভীষণ মাতামাতি।
    শারদীয়ার দিন গড়াতো শিউলি গন্ধে দুলে,
    রোজই যেতাম ঠাকুর গড়া দেখতে সদলবলে।
    নবীন কাকা গরিব মানুষ, সদাই হাসিমুখে,
    নিবিষ্ট মন, ব্যস্ত জীবন, আপন ভোলা সুখে।
    হাতের ছোঁয়ায় তৈরি হতো লক্ষ্মী, গণেশ, পেঁচা,
    দূর গাঁয়ে তার ছোট্ট বাড়ি, ঠাকুর গড়েই বাঁচা।
    সে বছর কি হলো বলি, শোনো দিয়ে মন,
    বন্যা হলো ভীষণরকম ভাসলো যে জীবন।
    কত মানুষ ঘর হারালো, প্রাণ হারালো কত,
    গোটা গ্রামের বুকটি জুড়ে হাজার আঘাত ক্ষত।
    ধানের জমি পাটের ক্ষেতে জল থৈ থৈ বান,
    সর্বনাশের কান্না ঘেরা হাজার নিঃস্ব প্রাণ।
    বর্ষা শেষে বন্যা গেল, জাগলো শারদ আলো,
    নীল আকাশে পুজোর ছুটি দিব্যি ডাক পাঠালো।
    কাশফুলেরা উঠল দুলে, শিউলি ঝরা দিন,
    পুজো আসছে রোদ্দুরে তাই বাজলো খুশির বীণ।
    নবীন কাকার টালির ঘরে হচ্ছে ঠাকুর গড়া,
    গেরুয়া নদীর পাড় ঘেঁষে গ্রাম জাগলো খুশির সাড়া।
    আমরা যত কচিকাঁচা, আবার জড়ো হয়ে,
    ঠাকুর দেখতে গেলাম ছুটে মাঠ ঘাট পেরিয়ে।
    সেবার মাত্র গুটিকয়েক ঠাকুর টালির ঘরে,
    পুজোর আয়োজন তো সেবার নমোনমো করে।
    তারই মধ্যে একটি ঠাকুর টালির চালের কোনে,
    নবীন কাকা ভাঙেন, গড়েন নিত্য আপন মনে।
    অন্য ঠাকুর দেখতে চাইলে বাধা দিতেন না,
    ওই ঠাকুরটি দেখতে চাইলে না শুধু না।
    কৌতূহলে দিন গড়ালো পুজো এলো কাছে,
    মহালয়ার দিন টি এলো পুজোর খুশির সাজে।
    আমরা কয়জন রাত থাকতে উঠেছি ঘুম ছেড়ে,
    পুবের আকাশ মলিন, আলো ধীরে উঠছে বেড়ে।
    অন্ধকারে চুপিসারে গুটিগুটি পায়ে,
    আমরা হাজির নবীন কাকার ঘরের কিনারায়।
    চুপ্টি করে দরজা ঠেলে ভিতরে গিয়ে,
    দেখি কাকা চোখ আঁকছেন সমস্ত মন দিয়ে।
    চোখ আঁকা যেই সাঙ্গ হল, নিথর নবীন কাকা,
    অঝোর ধারে কেঁদেই চলেন দুহাতে মুখ ঢাকা।
    কাঁদছে শিল্পী, নিরব বিশ্ব, কুপির আলো ঘরে,
    নবীন কাকার পাষাণ হৃদয় কান্না হয়ে ঝরে।
    রাত ফুরোনো ভোরের আকাশ, কৃপণ অল্প আলো,
    মুখ দেখলাম সেই ঠাকুরের, প্রাণ জুড়িয়ে গেল।
    কিন্তু একি? এ মুখ তো নয় দুর্গা বা পার্বতী?
    এ যেন এক ঘরের মেয়ে, চেনা জানা অতি।
    নবীন কাকার সামনে গিয়ে কি হয়েছে বলি,
    কেঁদে বলেন নবীন কাকা সবই জলাঞ্জলি।
    শ্রাবণ মাসে বন্যা হলো, গেল অনেক কিছু,
    মারণব্যাধি এলো তখন বানের পিছু পিছু।
    ভাদ্র মাসের পূর্ণিমাতে সেই ব্যধি যে ধরল,
    মেয়ে আমার অনেক কষ্টে যন্ত্রনাতে মরল।
    ঠাকুর গড়ি, দু হাত আমার অবশ হয়ে আসে,
    সব প্রতিমার মুখ জুড়ে ওই মেয়ের মুখটি ভাসে।
    দ্যাখ্ না তোরা, দ্যাখ্ না সবাই, চোখ আঁকা শেষ হলো,
    দ্যাখ্ না এইতো মেয়ে আমার হাসছে ঝলোমলো।
    কোথায় গেলি মা রে আমার? কোথায় তোকে পাই?
    মূর্তি গড়ে খুঁজি তোকে মূর্তিতে তুই নাই।
    ষষ্ঠী এলে বোধন, দেবীর প্রাণ প্রতিষ্ঠা হবে,
    জাগবে ঠাকুর, কিন্তু আমার মেয়ে ফিরবে কবে?
    কেউ কি কোন মন্ত্র জানো মৃন্ময়ী এই মেয়ে,
    বাবার চোখের জল মোছাতে উঠবে হেসে গেয়ে?
    আমরা অবাক! মহালয়ায় ভোরের শিউলি ঝরে,
    কি নিদারুণ ঠাকুর পুজো নবীন কাকার ঘরে!

     

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  5. কলকাতার যীশু – নীরেন্দ্রনাথ চক্রবর্তী লালবাতির নিষেধ ছিল না, তবুও ঝড়ের বেগে ধাবমান কলকাতা শহর অতর্কিতে থেমে গেল; ভয়ঙ্করভাবে টাল সামলে নিয়ে দাঁড়িয়ে রইল ট্যাক্সি ও প্রাইভেট, টেমপো, বাঘমার্কা ডবল-ডেকার। ‘গেল গেল’ আর্তনাদে রাস্তার দুদিক থেকে যারা ছুটে এসেছিল- ঝাঁকামুটে, ফিরিওয়ালা, দোকানি ও খরিদ্দার- এখনRead more

    কলকাতার যীশু – নীরেন্দ্রনাথ চক্রবর্তী

    লালবাতির নিষেধ ছিল না,
    তবুও ঝড়ের বেগে ধাবমান কলকাতা শহর
    অতর্কিতে থেমে গেল;
    ভয়ঙ্করভাবে টাল সামলে নিয়ে দাঁড়িয়ে রইল
    ট্যাক্সি ও প্রাইভেট, টেমপো, বাঘমার্কা ডবল-ডেকার।
    ‘গেল গেল’ আর্তনাদে রাস্তার দুদিক থেকে যারা
    ছুটে এসেছিল-
    ঝাঁকামুটে, ফিরিওয়ালা, দোকানি ও খরিদ্দার-
    এখন তারাও যেন স্থির চিত্রটির মতো শিল্পীর ইজেলে
    লগ্ন হয়ে আছে।
    স্তব্ধ হয়ে সবাই দেখছে,
    টালমাটাল পায়ে
    রাস্তার এক-পার থেকে অন্য পারে হেঁটে চলে যায়
    সম্পূর্ণ উলঙ্গ এক শিশু।

    খানিক আগেই বৃষ্টি হয়ে গেছে চৌরঙ্গিপাড়ায়।
    এখন রোদ্দুর ফের অতিদীর্ঘ বল্লমের মতো
    মেঘের হৃৎপিণ্ড ফুঁড়ে
    নেমে আসছে;
    মায়াবী আলোয় ভাসছে কলকাতা শহর।

    স্টেটবাসের জানালায় মুখ রেখে
    একবার আকাশ দেখি, একবার তোমাকে।
    ভিখারি-মায়ের শিশু,
    কলকাতার যিশু,
    সমস্ত ট্রাফিক তুমি মন্ত্রবলে থামিয়ে দিয়েছ।
    জনতার আর্তনাদ, অসহিষ্ণু ড্রাইভারের দাঁতের ঘষটানি,
    কিছুতে ভ্রুক্ষেপ নেই;
    দু’দিকে উদ্যত মৃত্যু, তুমি তার মাঝখান দিয়ে
    টলতে টলতে হেঁটে যাও।
    যেন মূর্ত মানবতা, সদ্য হাঁটতে শেখার আনন্দে
    সমগ্র বিশ্বকে তুমি পেতে চাও
    হাতের মুঠোয়। যেন তাই
    টাল্‌মাটাল পায়ে তুমি
    পৃথিবীর এক-কিনার থেকে অন্য-কিনারে চলেছ।

    English Transliteration:

    Lalbatir nished chilo na
    tabu o jharer bege dhabaman kolkata shahar
    Otarkite theme gelo;
    Voyongkar bhabe tal shamle niye dariye roilo
    Taxo O private, Tempo, Baghmarka double dekker
    ‘Gelo gelo’ aartanade rastar dudik theke jara
    chute eshechilo-
    Jhakamuthe, Feriwala, Dukanio khariddar-
    Ekhon tara o jeno stir chitrotir moto shilpir ejele lagna hoye aache
    Stabda hoye dekhche shobai,
    Talmatal paye
    rastar ek par theke onno pare hete chole jay
    shampurna ulanga ek shishu

    Khanik aagei bristi hoye geche chourangi paray.
    Ekhon ruddur otidirgo ballomer moto
    Megher ritpinda fure
    Neme aashche
    mayabi aaloy bhashche kolkata shahar

    State bus er janalay mukh rekhe
    Ekbaar aakash deki ekbaar tumake.
    Vikhari-mayer shishu
    Kalkatar jishu,
    Shamasta traffic tumi manthabale thamiye diyecho
    janatar aartonaad, oshohishnu driver er dater ghoshtani,
    kichute vrukkhep nei;
    Dudike uidyata mrityo, tumi tar majhkhan diye
    Talte talte hete jao.
    Jeno murta manobota, shodyo hatte shekhar aanande
    Shomogro bishooke tumi pete chao
    hater muthoy. Jeno tai
    talmatal paye tumi
    Prithibir ek kinara theke onno kinare cholecho

     

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  6. তেজ -দেবব্রত সিংহ ‘আমি জামবনির কুঁইরি পাড়ার শিবু কুঁইরির বিটি সাঁঝলি বটে।’ কাগজওয়ালারা বইললেক, “উঁ অতটুকু বইললে হবেক কেনে? তুমি এবারকার মাধ্যমিকে পত্থম হইছ। তোমাকে বইলতে হবেক আরো কিছু।” পঞ্চায়েতের অনি বৌদি, পধান, উপপধান, এইমেলে, এম.পি- সব একেবারে হামলিয়ে পড়ল আমাদের মাটির কুঁইড়েঘরে। জামবনি ইস্কুলের হRead more

    তেজ -দেবব্রত সিংহ

    ‘আমি জামবনির কুঁইরি পাড়ার শিবু কুঁইরির বিটি সাঁঝলি বটে।’

    কাগজওয়ালারা বইললেক,
    “উঁ অতটুকু বইললে হবেক কেনে?
    তুমি এবারকার মাধ্যমিকে পত্থম হইছ।
    তোমাকে বইলতে হবেক আরো কিছু।”

    পঞ্চায়েতের অনি বৌদি, পধান, উপপধান, এইমেলে, এম.পি-
    সব একেবারে হামলিয়ে পড়ল আমাদের মাটির কুঁইড়েঘরে।

    জামবনি ইস্কুলের হেডমাস্টার
    কোন বিহান বেলায় টিনের আগর খুইলে,
    হেইকে, ডেইকে, ঘুম ভাঙাই- খবরটা যখন পথম শুনালেক
    তখন মাকে জড়াই শুয়ে ছিলুম আমি।
    কুঁড়াঘরের ঘুটঘুইটা আঁধারে হেডমাস্টার মশাইরে দেইখে
    চোখ কচালে মায়ের পারা আমিও হাঁ – হয়ে ভাইবে ছিলেম।
    -একি স্বপন দেখছি নাকি-
    স্যার বইলল, এটা স্বপুন লয়, স্বপুন লয়, সত্যি বইটে।
    কথাটো শুইনে কেঁইনদে ভাসায়েছিলুম আমরা মা বিটি।

    আজ বাপ বেঁইচে থাইকলে
    আমি মানুষটাকে দেখাইতে পাইত্থম। দেখাইতে পাইতত্থেম বহুত কিছু-
    আমার বুকের ভিতর
    যে তেজালো সইনঝা বাতিটা জ্বালায়ে ছিল মানুষটা।
    সেই বাতিটা আজকে কেমন আমাদের কুঁইড়ে ঘরটাকে আলো কইরেছে।
    সেটো দেখাইতে পাইত্থম।

    আপনারা বইলছেন বটে
    “তুমাদের মতো মেইয়ারা যদি উঠে আসে তবে ভারতবর্ষ উঠে আসে।”
    কথাটা খুবই সত্যি, কিন্তু
    উঠে আসার রাস্তাটা যে এখোন তৈয়ার হয় নাই।
    খাড়া পাহাড়ে উঠা যে কি জিনিস।
    বহুত দম লাগে। বহুত ত্যাজ লাগে…

    আমি জামবনির কুঁইরি পাড়ার শিবু কুঁইরির বিটি সাঁঝলি।
    যখন থেকে হুঁশ হইছে তখন থেকে শুইনে আসছি
    “বিটি না মাটি’
    ঠাকুমা বইলথক্,
    পরের ঘরে হেঁইসেল ঠেইলবেক্ তার আবার লিখাপড়া’

    গাঁয়ের বাবুরা বইলথক্
    “দ্যাখ সাঁঝলি – মন খারাপ কইরলি তো হেইরে গেলি।
    শুন যে যা বইলছে বলুক্। সে সব কথা এক কানে সিধালে
    আর এক কানে বার কইরে দিবি।’

    তখ্যান বাবুপাড়ার দেঘইরা ঘরে কামিন খাইটতক মা।
    ক্ষয় রোগের তাড়সে-মায়ের গতরটা ভাঙে নাই অতোটা।
    মাঝে মইধ্যে জ্বরটর আইত বটে, জ্বর এলে মা
    চুপচাপ এঙনাতে তালাই পাইতে শুইয়ে থাইকতো।
    মনে আছে সে ছিল এক জাঁড় কালের সকাল।
    রোদ উঠেছিল ঝলমলানি ঝিঙা ফুলা রোদ।
    আমি সে রোদে পিঠ দিয়া গা দুলাই পড়ছিলাম
    ইতিহাস…
    কেলাস সেভেনের সামন্ত রাজাদের ইতিহাস।

    দে ঘরের গিন্নি লোক পাঠাইছিল বারকতক।
    মায়ের জ্বর সে তারা শুইনতে নাই চায়!
    আমাদের দিদি বুঢ়ি তখনো বাঁইচে।
    ছেঁড়া কম্বল মুড়হি দিয়ে বিড়ি ফুকছিল বুড়হি।
    শেষতক্ বুড়হি সেদিন পড়া থেকে উঠাই
    মায়ের কাইজ টুকুন কইরতে পাঠাই ছিল বাবু ঘরে।

    পুরানো ফটক ঘেরা উঠান-অতোবড়ো দরদালান- অতোবড়ো বারান্দা,
    সব ঝাঁট ফাট দিয়ে সাফ সুতরো করে আসছিলুম চইলে,
    দেঘইরে গিন্নি নাই ছাইড়ল্যাক, একগাদা এটাকাটা-জুঠা বাসন
    আমার সামনে আইনে ধইরে দিলেক। বইল্লুম
    “আমি তোমাদের জুঠা বাসন ধুইতে লাইরবো,”
    বাবু গিন্নির সেকি রাগ’-
    “কি বইল্লি তুই যতবড়ো মু লয় তত বড়ো কথা? জানিস,
    তর মা, তর মায়ের মা, তার মায়ের মা সবাই এতক্কাল
    আমাদের জুঠা বাসন ধুয়ে গুজারে গ্যালো
    আর তুই আমাদের জুঠা বাসন ধুইতে লাইরবি!”
    বল্লুম “হ আমি তোমাদের জুঠা বাসন ধুইতে লাইরবো।
    তোমরা লোক দেখে লাওগা। আমি চইল্লোম”
    কথাটো বইলে গটগট গটগট কইরে বাবু গিন্নির মুখের সামনে
    আমি বেড়োই চইলে আইলম।”

    তা বাদে সে লিয়ে কি কাইন্ড। কি ঝাম্যালা।
    বেলা ডুবলে মাহাতোদের ধান কাট্টে বাপ ঘরে ফিরে আইলে
    দুপাতা লিখাপড়া করা লাত্নির ছোট মুখে বড়ো থুতির কথা
    সাতকাহন কইরে বইলেছিল বুড়হি দিদি।

    মা কুনো রা কাড়ে নাই।
    আঘর মাসের সইন্ ঝা বেলাই এঙ্গ্নাতে আগুন জ্বেইলে
    গা-হাত-পা সেঁকছিল মা।

    একমাথা ঝাঁকড়া চুল ঝাঁকানো বাপের পেটানো পাথরের মুখটা
    ঝইলকে উঠেছিল আগুনের আঁচে।
    আমি বাপের অমুন চেহারা কুনোদিন দেখি লাই।
    বাপ সেদিন মা আর দিদি বুড়ির সমুখে আমাকে কাইছে ডেইকে
    মাথায় হাত বুলাই গম্ গইমা গলায় বইলেছিল –

    যা কইরেছিস্! বেশ্ কইরেছিস্।
    শুন্, তর মা, তর মায়ের মা, তার মায়ের মা- সবাই কইরেছে কামিনগিরি।
    বাবুঘরে গতর খাটাই খাইয়েছে। তাইতে হইছে টা কি।
    তাতে হইছে টা কি! ই-কথাটো মনে রাখবি সাঝ্লি,
    তুই কিন্তু কামিন হবার লাগে জম্মাস লাই।
    যত বড় লাট সাহেবই হোক কেনে কারু কাছে মাথা নোয়াই
    নিজের ত্যাজ বিকাবি লাই।
    এই ত্যাজ টুকুর ল্যাইগে লিখাপড়া শিখাচ্ছি তুকে।
    না হলে আমাদের মতো হা-ভাতা মানুষের ঘরে আর আছে টা কি?”

    আমি জামবনির কুইরি পাড়ার শিবু কুইরির বিটি সাঁঝলি,
    কবেকার সেই কেলাস সেভেনের কথা ভাবতে যায়ে
    কাগজওয়ালা টিভিওয়ালাদের সামনে এখুন কি যে বলি…

    তালপাতার রদ দিয়ে ঘেরা গোবুর লতার এঙ্গনাতে লুকে এখন লুকাকার।
    তার মাঝে বাঁশি বাজাই, জিপগাড়িতে চেইপে
    আগুপিছু পুলিশ লিয়ে মন্ত্রী আইল্যাক ছুটে।
    ‘কুথায় সাঁঝলি কুইরি কুথায়’, বইলতে বইলতে
    বন্দুকধারী পুলিশ লিয়ে সুজা আমাদের মাটির কুইড়ে ঘরে,

    হেডমাস্টার বইললে ‘পনাম কর, সাঁঝলি পনামকর’
    মন্ত্রী তখন পিঠ চাপড়াইল্যাক। পিঠ চাপরাই বইল্লেক,
    “তুমি কামিন খেইটে মাইধ্যমিকে পথম হইছ,
    তাই তুমারে দেইখতে আইলম্, সত্যিই বড় গরীব অবস্থা বটে।
    তুমাদের মতো মিয়ারা যাতে উঠে আসে
    তার লাগেই তো আমাদের পার্টি, তার লাগেই তো আমাদের সরকার।
    – এই লাও, দশ হাজার টাকার চেকটা এখুন লাও।
    শুন আমরা তুমাকে আরো ফুল দিব, সম্মর্ধ্বনা দিব,
    আরো দ্যাদার টাকা তুলে দিব।–
    এই টিবির লোক, কাগুজের লোক, কারা আছেন, ই-দিকে আসেন।“

    তক্ষুনি ছোট বড় কতরকমের সব ঝইলকে উঠল ক্যামেরা,
    ঝইলকে উঠল মন্ত্রীর মুখ। না না মন্ত্রী লয়, মন্ত্রী লয়,
    ঝইলকে উঠল আমার বাপের মুখ।
    গন্ গনা আগুনের পারা আগুন মানুষের মুখ।
    আমি তক্ষুনি বইলে উঠলম-
    “না না ই টাকা আমার নাই লাইগব্যাক। আর আপনারা
    যে আমায় ফুল দিব্যান, সম্মর্ধ্বনা দিব্যান বইলছেন তাও আমার নাই লাইগব্যাক।’

    মন্ত্রী তখন ঢোক গিলল্যাক।
    গাঁয়ের সেই দেঘইর‍্যা গিন্নির বড় ব্যাটা এখুন পাটির বড় ল্যাতা।
    ভিড় ঠেলে সে আইসে বইলল্যাক-
    “ ক্যানে, কি হইছেরে সাঁঝলি,
    তুই তো আমাদের বাড়ি কামিন ছিলি।
    বল তর কি কি লাইগব্যাক, বল, তর কি কি লাইগব্যাক খুলে বল খালি,”

    বইল্ লম –
    “ আমার পারা শয়ে শয়ে আর অনেক সাঁঝলি আছে।
    আর শিবু কুইরির বিটি আছে গাঁ গিরামে। তারা যদ্দিন
    অন্ধকারে পইড়ে থাইকবেক তারা যদ্দিন লিখ-পড়ার লাগে কাঁইদে বুলব্যাক্।
    তদ্দিন কুনো বাবুর দয়া আমার নাই লাইগব্যাক্। শুইনছ্যান আপনারা
    তদ্দিন কুনো বাবুর দয়া আমার নাই লাইগ্ ব্যাক।“

     

    English transliteration:

    Mu Jambanir kuiri parar shibu Kuirir biti Shajhli bote.

    Kagajwalara boillek
    Uuh ototuku bolole hobek kene?
    Tumi ebarkar maddyomik prothom hoiso.
    Tumake boilte hobek aaro kichu.

    Ponchayeter oni boudi, podhan, upapadhan, Eimele, MP
    Shob ekebare halmliye podlo amader matir kuireghore.

    Jamboni schooler headmaster
    Kono bihan belay tiner aagar khuile
    Heike, Deike, Ghum bhangai- khabarta jokhon prothom shunlek
    Takhan maake jorai shuye chilum aami.
    Kudaghorer ghutghuita aadhare deadmaster moshire deikhe
    Chokh kochale mayer para amio ha- hoye bhaibe chilem.
    -Eki shopon deksi naki-
    Sir boillo, Eta shpun loy, Shapun loy, Shottyi boite.
    KOthatu shuinle keinde bhashachilem amara ma beti

    Aj bap beiche thaikle
    Ami manushtake dekhaite paithum. Dekhaite paithem bahut kicu
    Amar buker vitor
    Je tejalo shoijha batita jalaye chilo manushta.
    Shei batita aajke kemon aamader kuire ghartake aalo koireche
    Sheto dekhaite paithum

    Apnara boilchen bote
    “Tumader moto meiyara jodi uth aashe tobe bharatborsho uthe aashe.
    Kothata khub e shotti kintu
    uthe aashar rasta je ekhono taiyyar hoy nai.
    khara pahare utha je ki jinish.
    bahut dam lage baht tej lage

    Ami Jambanir kuiri parar shibu Kuirir biti Shajhli.
    jakhan theke hush oise takhan theke shuine aashchi
    “biti na mati”
    Thakuma boiltak
    Parer ghare heichel theilbek tar abar likhapora’

    gayer babura boilthok
    deykh Shajhli- Mon kharap karli mto heiri geli.
    Shun je ja boilche baluk. She shob kotha ek kane shidhale
    Aar ek kane bar koira dibi.

    Takhan babuparar deghroiya ghaare kamin khaitak ma.
    Khay roger tadoshe -mayer gatarta venge nai otota.
    majhe moddhe jartor aaito bote, Jar ele maa
    Chupchap egnate talai paite shuiye thaikto.
    Mone aache she chilo ek jaro kaler shokal.
    Rod uthechichilo jhalmalani jinga ful rod
    Ami she rode pith diya ga dulai parchilam
    itihash…
    Kelas sevener shamanta rajader itihas

     

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  7. আমিই সেই মেয়ে- কবিতা সিংহ আমিই সেই মেয়েটি সেই মেয়ে যার জন্মের সময় কোন শাঁখ বাজেনি জন্ম থেকেই যে জ্যোতিষীর ছঁকে বন্দী যার লগ্ন রাশি রাহু কেতুর দিশা খোঁজা হয়েছে না, তার নিজের জন্য নয় তার পিতার জন্য আর ভাই এর জন্য তার স্বামীর জন্য তার পুত্রের জন্য কিন্তু যার গর্ভ থেকে আমার জন্ম সেই মায়ের কথা বলেনRead more

    আমিই সেই মেয়ে- কবিতা সিংহ

    আমিই সেই মেয়েটি সেই মেয়ে
    যার জন্মের সময় কোন শাঁখ বাজেনি
    জন্ম থেকেই যে জ্যোতিষীর ছঁকে বন্দী
    যার লগ্ন রাশি রাহু কেতুর
    দিশা খোঁজা হয়েছে না, তার নিজের জন্য নয়
    তার পিতার জন্য আর ভাই এর জন্য
    তার স্বামীর জন্য তার পুত্রের জন্য
    কিন্তু যার গর্ভ থেকে আমার জন্ম
    সেই মায়ের কথা বলেনি কেউ।

    আমিই সেই মেয়েটি সেই মেয়েটি
    যে জন্ম থেকেই বিবাহের
    জন্য বলি প্রদত্ত
    যার বাইরের চেহারা
    চোখ – নাক-মুখ- ত্বক- চুল – রঙ
    নিয়েই দর কষাকষি
    কাল না ফর্সা
    খাঁদা না টিকালো
    লম্বা না বেঁটে
    খুতখুতে না টানা টানা
    যার মাথার বাইরেটা নিয়েই সকলের ভাবনা
    মাথার ভিতরটা নিয়ে কারও কোন মাথা ব্যথা নেই
    আমিই সেই মেয়েটি যে ছোটবেলা থেকে শুনেছে
    জোরে জোরে কথা বলতে নেই
    ছুটতে নেই -চেঁচাতে নেই- হাসতে নেই
    এমন কি কাঁদলেও তা লুকিয়ে লুকিয়ে

    আমিই সেই মেয়েটি যাকে বলতে নেই –
    খিদে পেয়েছে – ঘুম পেয়েছে – ইচ্ছে করছেনা-
    ক্লান্ত লাগছে -আর পারছিনা — আর পারছিনা।
    আমিই সেই মেয়েটি খেলার জন্য যার
    হাতে তুলে দেওয়া হয়েছে পুতুল
    পুতুলের আদল পাবার জন্য
    পুতুলের সংসার বানাবার জন্য।

    আমিই সেই মেয়েটি যে গত কোন
    শতাব্দী তে পাঁচ বছর বয়সে মালা দিয়েছে –
    গঙ্গা যাত্রীর গলায়
    কুলীন ব্রাম্মন এর তিনশো পঁয়ষট্টি তম স্ত্রীর
    অন্যতমা হয়ে স্বামীর গরবে হয়েছি গরবিনী
    একাদশীর দিন অবুজ দশমীর বালিকার তৃষ্ণায় –
    আটক ঘরের মাটি লেহন করতে করতে প্রান ত্যাগ করেছি
    সন্তানের পর সন্তান জন্ম দিতে দিতে যন্ত্রণায়
    মুখ থুবড়ে পরেছি সূতিকাগারে
    জ্বলে পুড়ে মরেছি সতীদাহে।

    আমি বুঝতে পারিনি যে চাকরীর জায়গায়
    নিজের কাজের কুশলতা দেখাতে নেই
    আমি বুঝতে পারিনি যে আমার প্রেমিককে
    তার প্রেম পত্রের বানান ভুল গুল ধরিয়ে দেওটাই
    আমার ভুল হয়ে ছিল
    আমি বুঝতে পারিনি আমি যদি কবি হতে চাই
    আমার বন্ধুরা বলবে ”ওটা কবিতা হয়নি পদ্য হয়েছে”

    আমি বুঝতে পারিনি যে বিংশ শতাব্দীর শেষ সীমানায় এসে দাড়িয়েও
    এইপুরুষ শাসিত সমাজ বুদ্ধিমতিদের জন্য অপ্রস্তুত
    আমি সেই মেয়েটি যে দেখেছে একটি নারী
    কেমন করে নিছক মেয়েছেলে বনে যায়
    চরিত্রের উলটো দিকে হেঁটে যায় সফল স্বামীদের গিন্নীরা
    শিক্ষার চেয়ে উজ্জলতা পায় বেনারসি সাড়ীর ফুলকি
    বুদ্ধির চেয়ে দিপ্তিমান হয়ে ওঠে অন্ধকারে হীরা পান্না

    আমি সেই মেয়েটি জানেন আমি সেই মেয়েটি
    যে জীবনের কয়েকটি বছর ভুলের পরে ভুল
    পুনরুপি ভুল করে চলেছি
    অন্ধকারের দিনে ফিরতে পারিনা বলেই কি
    আমি অপমানের জলন্ত কয়লার উপর দিকে হেঁটে যেতে চাই
    যেতে চাই দুঃখের দিকে
    আমি প্রনাম জানাই সেই প্রথম আগুনকে
    যার নাম বর্ণপরিচয়
    সেই অগ্নি সুদ্ধ পরম্পরাকে সেইসব পুরুষ রমণীকে
    যারা উনবিংশ শতাব্দীর অন্ধকারের হাতলে জ্ঞানের আলো জ্বালিয়ে
    এক জন্মে আমাকে জন্ম জন্মান্তরের দরজা খুলে দিয়েছে।

    আমি আজ প্রেমের জন্য ফেলে যাচ্ছি আরাম-
    শোকার্জিত শাকান্নের জন্য ফেলে যাচ্ছি ক্রীতদাসের চর্ব্যচোষ্য
    জেগে থাকার জন্য ফেলে যাচ্ছি ভাত ঘুম,
    যন্ত্রণার জন্য ফেলে যাচ্ছি সুখ –
    জ্ঞানের জন্য ফেলে যাচ্ছি অন্ধতা
    আনন্দের জন্য ফেলে যাচ্ছি সাফল্য
    অমৃতের জন্য ঐশ্বর্য।
    আমার হাতে জ্বলছে দিশারীদের শিক্ষার মহান আগুন

    আমিই সেই মেয়েটি———
    আপনারা নিজের দর্পণে দেখে আমাকে চিনুন
    আমাকে চিনুন – আমাকে চিনুন।।

     

     

    English Transliteration: 

     

    Ami Shei Meyeti, Shei meye
    jar jonmer shomoy kono shakh bajeni
    Jonmo thekei je Jyotishir choke bondi
    jar logno rasi rahu ketur
    Disha Khuja hoyeche na, tar nijer jonno noy
    Tar pitar jonno r bhai er jonno
    tar shamir jonno r putrer jonno
    Kintu jar gorvo theke amar janma
    Shei mayer kotha boleni keu.

    Ami Shei Meyeti, Shei meyeti
    Je janma thekei bibaher
    Jonno bole prodotto
    jar bairer chehara
    chok-Nak-mukh-tak-chul-rang
    Niyei dor koshakoshi
    kalo na forsha
    Khada na tikalo
    lomba na bete
    khutkhute na tantana
    jar mathar baireta niyei shokoler bhabona
    mathar vitorta niye kar o kuno matha byatha nei

    Ami shei meyeti je chotobela theke shuneche
    Jore jore kotha bolte nei
    Chutte nei-chechate nei-hashte nei
    Emonki kadleo ta lukiye lukiye
    Ami shei meyeti jake bolte nei
    Khide peyeche-ghum peyeche-icche korchena
    Klanta lagche-aar parchi na- r parchi na

    Ami Shei Meyeti khelar jonno jar
    haate tule dewa hocche putul
    Putuler aadol pawar jonno
    Putuler shonshar banabar jonno

    Ami Shei Meyeti Je goto kono
    shotabdi te panch bachar boyoshe mala diyeche
    Ganga jatrir golay
    Kulin Brahmaner tin sho poyshotti tama strir
    Onnotama hoye shamir garabe hoyechi garabini
    ekadashir din abuj dashamir balikar trishnay
    aatak ghorer mati lehon korte korte pran tyag korechi
    Shontaner par shantan janma dite dite jantronay
    Mukh thubre porechi shutikagare
    Jole pure morechi shotidahe.

    Ami bujhte parini je charir jaygay
    Nijer kajer kushalata dekhate nei
    Ami bujhte parini je amar premik ke
    Tar prem potrer banan bhulgulo dhoriye dewatai
    Amar bhul hoyechilo
    Ami bujhte parini ami jodio kobi hote chai
    Amar bandura bolbe “ota kobita hoini podyo hoyeche”
    Ami bujhte parini je bingsho shotabdir shesh shimanay eshe dariye o
    Ei purush shashito shomaj buddhimatider jonno oprastut

    Ami shei meyeti je dekheche ekti naari
    kemon kore nisok meyechele bone jay
    Charitrer ulto dike hete jay shofol shamider ginnira
    Shikkhar cheye ujjolota pay benarashi sharir fulki
    Buddhir cheye diptoman hoye uthe ondhokare hira panna

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  8. একই নামে দুটি কবিতা লেখা হয়েছে। দুটি কবিতায় নারীবাদী কবিতা যা পুরুষতান্ত্রিক সমাজের নারীর নিত্য দিনের শোষণ ও দুঃখের কথা উল্লেখ হয়েছে। আমি সেই মেয়ে - লিখেছেন শুভ দাসগুপ্ত আমি সেই মেয়েটি - কবিতা সিংহ   আমিই সেই মেয়ে (শুভ দাশগুপ্ত) আমিই সেই মেয়ে। বাসে ট্রেনে রাস্তায় আপনি যাকে রোজ দেখেন যার শাড়ি, কRead more

    একই নামে দুটি কবিতা লেখা হয়েছে। দুটি কবিতায় নারীবাদী কবিতা যা পুরুষতান্ত্রিক সমাজের নারীর নিত্য দিনের শোষণ ও দুঃখের কথা উল্লেখ হয়েছে।
    আমি সেই মেয়ে – লিখেছেন শুভ দাসগুপ্ত
    আমি সেই মেয়েটি – কবিতা সিংহ

     

    আমিই সেই মেয়ে (শুভ দাশগুপ্ত)

    আমিই সেই মেয়ে।
    বাসে ট্রেনে রাস্তায় আপনি যাকে রোজ দেখেন
    যার শাড়ি, কপালের টিপ কানের দুল আর পায়ের গোড়ালি
    আপনি রোজ দেখেন।
    আর
    আরও অনেক কিছু দেখতে পাবার স্বপ্ন দেখেন।
    স্বপ্নে যাকে ইচ্ছে মতন দেখেন।
    আমিই সেই মেয়ে।

    বিহারের প্রত্যন্ত গ্রামে দিনের আলোয় যার ছায়া মাড়ানো
    আপনার ধর্মে নিষিদ্ধ, আর রাতের গভীরে যাকে বস্তি থেকে
    তুলে আনতে পাইক বরকন্দাজ পাঠান আপনি
    আর সুসজ্জিত বিছানায় যার জন্য অপেক্ষায় অধীন হয়
    আপনার রাজকীয় লাম্পট্য
    আমিই সেই মেয়ে।

    আমিই সেই মেয়ে- আসামের চাবাগানে ঝুপড়ি কামিন বস্তি থেকে
    যাকে আপনি নিয়ে যেতে চান সাহেবি বাংলোয় মধ্যরাতে
    ফায়ার প্লেসের ঝলসে ওঠা আলোয় মদির চোখে দেখতে চান
    যার অনাবৃত শরীর
    আমি সেই মেয়ে।

    রাজস্থানের শুকনো উঠোন থেকে পিপাসার জল আনতে যাকে আপনি
    পাঠিয়ে দেন দশ মাইল দূরে সরকারি ইঁদারায়- আর কুড়ি মাইল
    হেঁটে কান্ত বিধ্বস্ত যে রমণী ঘড়া কাঁখে ঘরে ফিরলেই যাকে বসিয়ে দেন
    চুলার আগুনের সামনে আপনার রুটি বানাতে
    আমিই সেই মেয়ে।

    আমিই সেই মেয়ে- যাকে নিয়ে আপনি মগ্ন হতে চান গঙ্গার ধারে কিংবা
    ভিক্টোরিয়ার সবুজে কিংবা সিনেমা হলের নীল অন্ধকারে, যার
    চোখে আপনি একে দিতে চান ঝুটা স্বপ্নের কাজল আর ফুরিয়ে যাওয়া
    সিগারেটের প্যাকেটের মত যাকে পথের পাশে ছুঁড়ে ফেলে আপনার ফুল সাজানো
    গাড়ি শুভবিবাহ সুসম্পন্ন করতে ছুটে যায় শহরের পথে-
    কনে দেখা আলোর গোধুলিতে একা দাঁড়িয়ে থাকা
    আমিই সেই মেয়ে।

    আমিই সেই মেয়ে- এমন কি দেবতারাও যাকে ক্ষমা করেন না। অহংকার
    আর শক্তির দম্ভে যার গর্ভে রেখে যান কুমারীর অপমান
    আর চোখের জলে কুন্তী হয়ে নদীর জলে
    বিসর্জন দিতে হয় কর্ণকে। আত্মজকে।
    আমিই সেই মেয়ে।

    সংসারে অসময়ের আমিই ভরসা।
    আমার ছাত্র পড়ানো টাকায় মায়ের ওষুধ কেনা হয়।
    আমার বাড়তি রোজগারে ভাইয়ের বই কেনা হয়।
    আমার সমস্ত শরীর প্রবল বৃষ্টিতে ভিজতে থাকে।
    কালো আকাশ মাথায় নিয়ে
    আমি ছাতা হয়ে থাকি।
    ছাতার নিচে সুখে বাঁচে সংসার।

    আপনি
    আপনারা
    আমার জন্য অনেক করেছেন।
    সাহিত্যে কাব্যে শাস্ত্রে লোকাচারে আমাকে
    মা বলে পুজো করেছেন।
    প্রকৃতি বলে আদিখ্যেতা করেছেন- আর
    শহর গঞ্জের কানাগলিতে
    ঠোঁটে রঙ মাখিয়ে কুপি হাতে দাঁড় করিয়েও দিয়েছেন।
    হ্যা, আমিই সেই মেয়ে।
    একদিন হয়ত
    হয়ত একদিন- হয়ত অন্য কোন এক দিন
    আমার সমস্ত মিথ্যে পোশাক ছুঁড়ে ফেলে দিয়ে
    আমিই হয়ে উঠবো সেই অসামান্যা !
    খোলা চুল মেঘের মত ঢাকবে আমার খোলা পিঠ।
    দু চোখে জ্বলবে ভীষণ আগুন।
    কপাল-ঠিকরে বেরুবে ভয়ঙ্কর তেজরশ্মি।
    হাতে ঝলসে উঠবে সেই খড়গ।
    দুপায়ের নুপুরে বেজে উঠবে রণদুন্দভি।
    নৃশংস অট্টহাসিতে ভরে উঠবে আকাশ।
    দেবতারাও আতঙ্কে স্তব্ধ হয়ে বলতে থাকবেন
    মহামেঘপ্রভাং ঘোরাং মুক্তকেশীং চতুর্ভুজাং
    কালিকাং দক্ষিণাং মুণ্ডমালা বিভুষিতাং।

    বীভৎস দাবানলের মত
    আমি এগোতে থাকবো ! আর আমার এগিয়ে যাবার পথের দুপাশে
    মুণ্ডহীন অসংখ্য দেহ ছটফট করতে থাকবে-
    সভ্যতার দেহ
    প্রগতির দেহ-
    উন্নতির দেহ-
    সমাজের দেহ

    হয়ত আমিই সেই মেয়ে ! হয়ত ! হয়ত বা।

    English Transliteration:

    Ami shei meye
    Bus e train rastay aapni jake roj dekhen
    Jar Shari, Kopaler tip kaner dul aar payer gorali
    aapni roj dekhen
    Aar
    Aar o onek kichu dekhte parar shopno dekhen
    Shopne jake icche moton dekhen.
    Ami shei meye
    Biharer protontyo grame diner aaloy jar chaya marano
    Apnar dhorme nishiddo, r rater ghovire jake basti theke
    tule aante paik barkondaz pathan aapni
    Aar shushojjito bichanay jar jonno opekkhay odhin hoy
    Apnar rajokiyo lampottyo
    Ami e shei meye
    Ami e shei meye- Assamer chabagane Jhupri kamin basti theke
    Jake aapne niye jete chan shahebi bangloy moddorate
    Fiar Placer jholshe utha aaloy modir chokhe dekhte chan
    Jar onabrito shorir
    Ami Shei meye.
    Rajastaner shukno uthon theke pipashar jol aante jake aapni
    Pathiye den dash mile dure shorkari idaray- Aar kuri mile
    Hete klanto biddasto je ramani ghora kake ghore firlei jake bashiye den
    Chulkar aaguner shamne apnar roti banate
    Ami e shei meye.
    Ami e shei meye- jake niye aaoni magna hote chan gangar dhare kingba
    Vitoriar shabuje kingba Cinema haller nil ondokarte, jar
    Chokhe aapni jhuta shopner kajol aar furiye jawa
    Cigarater packeter moto jake pather pashe chure kele aapnar ful shajano
    Gari shuvobibaho shushamponno korte chute jay shohorer pothe
    kone dekha aalor gudhulite Eka dariye thaka
    Ami e shei meye
    Ami e shei meye- Emon ki debotarao jake khoma koren na. Ahankar
    Aar shaktir dambhe jar garbe rekhe jan kumarir opman
    Aar chokher jole kunti hoye nadir jole
    bishorjon dite hoy karnake. Aattajke
    Ami e shei meye
    Shongshare oshomoyer aami e bhorosha.
    Amar chatro poranor takay mayer oshudh kena hoy.
    amar barti rojgaare bhai er boin kena hoy.
    Amar shomosto shorir bristite vijte thake
    Kalo aakash mathay niye
    Ami chata hoye thaki.
    chatar niche shukhe bache shongshar
    Aapni
    Apnara
    Amar jonno onek korechen
    Shahitte kabbe shastre lokachare amake
    Maa bole pujo korechen
    Prokriti bole aadikhetto korechen-Aar
    Shahar ganjer kanagalite
    Thote rang makhiye kupi haate dar koriyeo diyechen.
    Ha Ami shei meye.
    Ekdin hoyto- onno kono ek din
    Amar shomosto pushak chure fele diye
    Ami e hoye uthbo shei oshamanno!
    Khola chul megher moto dhakbe amar khula pith
    Du chokhe jolbe vishan aagun.
    Kopal-thikre berube voyonkar tejrashmi
    Haate jolshe uthbe shei khargo
    Du payer nupure beje uthbe randundavi
    Nrishansho ottohashite bhore uthbe aakash.
    Debotara o aatonke shabda hoye bolte thakben
    Mohameghprobang ghorang muktokeshing chaturbhujang
    kalikang dokkinang munndomala bhibushitang.
    bibhotsho dabanoler moto
    ami egote thakbo! Aar amar egiye jawar pather dupashe
    Munduhin oshonkhyo deho chotfot korte thakbe-
    Shovhotar deho
    Pragatir deho
    Unnatir deho
    Shomajer deho
    hoyto ami shei meye! hoyto! hoyto ba!

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  9. আমিই সেই মেয়ে (শুভ দাশগুপ্ত) আমিই সেই মেয়ে। বাসে ট্রেনে রাস্তায় আপনি যাকে রোজ দেখেন যার শাড়ি, কপালের টিপ কানের দুল আর পায়ের গোড়ালি আপনি রোজ দেখেন। আর আরও অনেক কিছু দেখতে পাবার স্বপ্ন দেখেন। স্বপ্নে যাকে ইচ্ছে মতন দেখেন। আমিই সেই মেয়ে। বিহারের প্রত্যন্ত গ্রামে দিনের আলোয় যার ছায়া মাড়ানো আপনার ধর্মে নRead more

    আমিই সেই মেয়ে (শুভ দাশগুপ্ত)

    আমিই সেই মেয়ে।
    বাসে ট্রেনে রাস্তায় আপনি যাকে রোজ দেখেন
    যার শাড়ি, কপালের টিপ কানের দুল আর পায়ের গোড়ালি
    আপনি রোজ দেখেন।
    আর
    আরও অনেক কিছু দেখতে পাবার স্বপ্ন দেখেন।
    স্বপ্নে যাকে ইচ্ছে মতন দেখেন।
    আমিই সেই মেয়ে।

    বিহারের প্রত্যন্ত গ্রামে দিনের আলোয় যার ছায়া মাড়ানো
    আপনার ধর্মে নিষিদ্ধ, আর রাতের গভীরে যাকে বস্তি থেকে
    তুলে আনতে পাইক বরকন্দাজ পাঠান আপনি
    আর সুসজ্জিত বিছানায় যার জন্য অপেক্ষায় অধীন হয়
    আপনার রাজকীয় লাম্পট্য
    আমিই সেই মেয়ে।

    আমিই সেই মেয়ে- আসামের চাবাগানে ঝুপড়ি কামিন বস্তি থেকে
    যাকে আপনি নিয়ে যেতে চান সাহেবি বাংলোয় মধ্যরাতে
    ফায়ার প্লেসের ঝলসে ওঠা আলোয় মদির চোখে দেখতে চান
    যার অনাবৃত শরীর
    আমি সেই মেয়ে।

    রাজস্থানের শুকনো উঠোন থেকে পিপাসার জল আনতে যাকে আপনি
    পাঠিয়ে দেন দশ মাইল দূরে সরকারি ইঁদারায়- আর কুড়ি মাইল
    হেঁটে কান্ত বিধ্বস্ত যে রমণী ঘড়া কাঁখে ঘরে ফিরলেই যাকে বসিয়ে দেন
    চুলার আগুনের সামনে আপনার রুটি বানাতে
    আমিই সেই মেয়ে।

    আমিই সেই মেয়ে- যাকে নিয়ে আপনি মগ্ন হতে চান গঙ্গার ধারে কিংবা
    ভিক্টোরিয়ার সবুজে কিংবা সিনেমা হলের নীল অন্ধকারে, যার
    চোখে আপনি একে দিতে চান ঝুটা স্বপ্নের কাজল আর ফুরিয়ে যাওয়া
    সিগারেটের প্যাকেটের মত যাকে পথের পাশে ছুঁড়ে ফেলে আপনার ফুল সাজানো
    গাড়ি শুভবিবাহ সুসম্পন্ন করতে ছুটে যায় শহরের পথে-
    কনে দেখা আলোর গোধুলিতে একা দাঁড়িয়ে থাকা
    আমিই সেই মেয়ে।

    আমিই সেই মেয়ে- এমন কি দেবতারাও যাকে ক্ষমা করেন না। অহংকার
    আর শক্তির দম্ভে যার গর্ভে রেখে যান কুমারীর অপমান
    আর চোখের জলে কুন্তী হয়ে নদীর জলে
    বিসর্জন দিতে হয় কর্ণকে। আত্মজকে।
    আমিই সেই মেয়ে।

    সংসারে অসময়ের আমিই ভরসা।
    আমার ছাত্র পড়ানো টাকায় মায়ের ওষুধ কেনা হয়।
    আমার বাড়তি রোজগারে ভাইয়ের বই কেনা হয়।
    আমার সমস্ত শরীর প্রবল বৃষ্টিতে ভিজতে থাকে।
    কালো আকাশ মাথায় নিয়ে
    আমি ছাতা হয়ে থাকি।
    ছাতার নিচে সুখে বাঁচে সংসার।

    আপনি
    আপনারা
    আমার জন্য অনেক করেছেন।
    সাহিত্যে কাব্যে শাস্ত্রে লোকাচারে আমাকে
    মা বলে পুজো করেছেন।
    প্রকৃতি বলে আদিখ্যেতা করেছেন- আর
    শহর গঞ্জের কানাগলিতে
    ঠোঁটে রঙ মাখিয়ে কুপি হাতে দাঁড় করিয়েও দিয়েছেন।
    হ্যা, আমিই সেই মেয়ে।
    একদিন হয়ত
    হয়ত একদিন- হয়ত অন্য কোন এক দিন
    আমার সমস্ত মিথ্যে পোশাক ছুঁড়ে ফেলে দিয়ে
    আমিই হয়ে উঠবো সেই অসামান্যা !
    খোলা চুল মেঘের মত ঢাকবে আমার খোলা পিঠ।
    দু চোখে জ্বলবে ভীষণ আগুন।
    কপাল-ঠিকরে বেরুবে ভয়ঙ্কর তেজরশ্মি।
    হাতে ঝলসে উঠবে সেই খড়গ।
    দুপায়ের নুপুরে বেজে উঠবে রণদুন্দভি।
    নৃশংস অট্টহাসিতে ভরে উঠবে আকাশ।
    দেবতারাও আতঙ্কে স্তব্ধ হয়ে বলতে থাকবেন
    মহামেঘপ্রভাং ঘোরাং মুক্তকেশীং চতুর্ভুজাং
    কালিকাং দক্ষিণাং মুণ্ডমালা বিভুষিতাং।

    বীভৎস দাবানলের মত
    আমি এগোতে থাকবো ! আর আমার এগিয়ে যাবার পথের দুপাশে
    মুণ্ডহীন অসংখ্য দেহ ছটফট করতে থাকবে-
    সভ্যতার দেহ
    প্রগতির দেহ-
    উন্নতির দেহ-
    সমাজের দেহ

    হয়ত আমিই সেই মেয়ে ! হয়ত ! হয়ত বা।

    English Transliteration:

    Ami shei meye
    Bus e train rastay aapni jake roj dekhen
    Jar Shari, Kopaler tip kaner dul aar payer gorali
    aapni roj dekhen
    Aar
    Aar o onek kichu dekhte parar shopno dekhen
    Shopne jake icche moton dekhen.
    Ami shei meye
    Biharer protontyo grame diner aaloy jar chaya marano
    Apnar dhorme nishiddo, r rater ghovire jake basti theke
    tule aante paik barkondaz pathan aapni
    Aar shushojjito bichanay jar jonno opekkhay odhin hoy
    Apnar rajokiyo lampottyo
    Ami e shei meye
    Ami e shei meye- Assamer chabagane Jhupri kamin basti theke
    Jake aapne niye jete chan shahebi bangloy moddorate
    Fiar Placer jholshe utha aaloy modir chokhe dekhte chan
    Jar onabrito shorir
    Ami Shei meye.
    Rajastaner shukno uthon theke pipashar jol aante jake aapni
    Pathiye den dash mile dure shorkari idaray- Aar kuri mile
    Hete klanto biddasto je ramani ghora kake ghore firlei jake bashiye den
    Chulkar aaguner shamne apnar roti banate
    Ami e shei meye.
    Ami e shei meye- jake niye aaoni magna hote chan gangar dhare kingba
    Vitoriar shabuje kingba Cinema haller nil ondokarte, jar
    Chokhe aapni jhuta shopner kajol aar furiye jawa
    Cigarater packeter moto jake pather pashe chure kele aapnar ful shajano
    Gari shuvobibaho shushamponno korte chute jay shohorer pothe
    kone dekha aalor gudhulite Eka dariye thaka
    Ami e shei meye
    Ami e shei meye- Emon ki debotarao jake khoma koren na. Ahankar
    Aar shaktir dambhe jar garbe rekhe jan kumarir opman
    Aar chokher jole kunti hoye nadir jole
    bishorjon dite hoy karnake. Aattajke
    Ami e shei meye
    Shongshare oshomoyer aami e bhorosha.
    Amar chatro poranor takay mayer oshudh kena hoy.
    amar barti rojgaare bhai er boin kena hoy.
    Amar shomosto shorir bristite vijte thake
    Kalo aakash mathay niye
    Ami chata hoye thaki.
    chatar niche shukhe bache shongshar
    Aapni
    Apnara
    Amar jonno onek korechen
    Shahitte kabbe shastre lokachare amake
    Maa bole pujo korechen
    Prokriti bole aadikhetto korechen-Aar
    Shahar ganjer kanagalite
    Thote rang makhiye kupi haate dar koriyeo diyechen.
    Ha Ami shei meye.
    Ekdin hoyto- onno kono ek din
    Amar shomosto pushak chure fele diye
    Ami e hoye uthbo shei oshamanno!
    Khola chul megher moto dhakbe amar khula pith
    Du chokhe jolbe vishan aagun.
    Kopal-thikre berube voyonkar tejrashmi
    Haate jolshe uthbe shei khargo
    Du payer nupure beje uthbe randundavi
    Nrishansho ottohashite bhore uthbe aakash.
    Debotara o aatonke shabda hoye bolte thakben
    Mohameghprobang ghorang muktokeshing chaturbhujang
    kalikang dokkinang munndomala bhibushitang.
    bibhotsho dabanoler moto
    ami egote thakbo! Aar amar egiye jawar pather dupashe
    Munduhin oshonkhyo deho chotfot korte thakbe-
    Shovhotar deho
    Pragatir deho
    Unnatir deho
    Shomajer deho
    hoyto ami shei meye! hoyto! hoyto ba!

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  10. প্লাসমা থেরাপি চিকিৎসা বিজ্ঞানে একেবারেই একটি নতুন বিষয় নয়। ইহা একটি প্রাচীন চিকিৎসা পদ্ধতি যার ব্যবহার অনেক প্রাচীনকাল থেকেই শুরু হয়েছে। প্লাসমা হল রক্তরস। আর এই রক্ত রসের স্থানান্তরের নামই প্লাসমা থেরাপি। এই থেরাপিতে কোন এক ব্যধি থেকে সুস্থ হওয়া ব্যক্তির রক্ত রস সংগ্রহ করে সেই ব্যধিতে আক্রান্তRead more

    প্লাসমা থেরাপি চিকিৎসা বিজ্ঞানে একেবারেই একটি নতুন বিষয় নয়। ইহা একটি প্রাচীন চিকিৎসা পদ্ধতি যার ব্যবহার অনেক প্রাচীনকাল থেকেই শুরু হয়েছে।

    প্লাসমা হল রক্তরস। আর এই রক্ত রসের স্থানান্তরের নামই প্লাসমা থেরাপি। এই থেরাপিতে কোন এক ব্যধি থেকে সুস্থ হওয়া ব্যক্তির রক্ত রস সংগ্রহ করে সেই ব্যধিতে আক্রান্ত অন্য রোগীর শরীরে তা প্রবেশ করানো হয়।

    তাই যেসকল রোগী করোনা ভাইরাস থেকে ইতিমধ্যে সুস্থ হয়ে উঠেছেন বা মুক্তি পেয়েছেন তাদের রক্তরস বা প্লাজমা কালেক্ট করে অন্য করোনা আক্রান্ত ব্যক্তির শরীরে প্লাসমা বা রক্ত স্থানান্তর করা হবে বা হচ্ছে। তাতে করে সুস্থ হওয়া ব্যক্তির এন্টিবডি আক্রান্তের ভাইরাসকে মেরে তাকে সুস্থ হয়ে উঠতে সাহায্য করবে।

    ইতিমধ্যে ইরান সহ আরো কিছু দেশে করানো মোকাবেলায় প্লাসমা থেরাপি আরম্ভ করা হয়েছে। এবং ভারত সরকার ইতিমধ্যেই ইন্ডিয়ান কাউন্সিল অফ মেডিকেল রিসার্চ সেন্টারের নির্দেশনা মেনে ক্লিনিক্যাল ট্রায়ালের ভিত্তিতে প্লাসমা থেরাপি শুরু করার জন্য বিভিন্ন সংস্থাকে আর্জি জানিয়েছে। আশা করা হচ্ছে করোনা ভাইরাস মোকাবেলায় এই থেরাপি কার্যকরী হয়ে উঠবে।

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